SBI की बेजोड़ स्कीम, ₹5,00,000 जमा करने पर ₹1,54,795 मिलेगा पक्का रिटर्न, पैसे की रहेगी फुल सेफ्टी
SBI की बेजोड़ स्कीम, ₹5,00,000 जमा करने पर ₹1,54,795 मिलेगा पक्का रिटर्न, पैसे की रहेगी फुल सेफ्टी
अगर आप बाजार में निवेश से बचना चाहते हैं यानी जोखिम नहीं लेना चाहते हैं तो एसबीआई की यह स्कीम आपके लिए काफी बेहतर है। आप तनाव रहित रिटर्न हासिल कर सकते हैं।
देश का सबसे बड़ा बैंक, भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई तमाम अवधियों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) स्कीम में निवेश के लिए ऑफर करता है। निवेश अवधि और ब्याज की दर आपको चुननी होती है। आप मैक्सिमम 10 साल तक की एफडी का विकल्प चुन सकते हैं। एसबीआई की एफडी स्कीम में आपकी निवेश रकम पूरी तरह सुरक्षित होती है, क्योंकि इस रकम का मार्केट से कोई कनेक्शन नहीं होता है। एफडी एक तरह का इन्वेस्टमेंट साधन है जिसमें आप एक तय समय के लिए एकमुश्त पैसा जमा करते हैं और उस पर पहले से तय ब्याज कमाते हैं। एफडी यानी फिक्स्ड डिपोजिट उन निवेशकों के लिए खास निवेश स्कीम है जो जोखिम नहीं लेना चाहते हैं।
5,00,000 जमा पर ₹1,54,795 का रिटर्न
मौजूदा समय में भारतीय स्टेट बैंक 3 वर्ष से अधिक परंतु 5 वर्ष से कम अवधि के लिए सामान्य ग्राहक को 6.30 प्रतिशत ब्याज ऑफर कर रहा है, जबकि सीनियर सिटीजन को 6.80 प्रतिशत ब्याज दिया जा रहा है। एसबीआई एफडी कैलकुलेटर के मुताबिक, अब अगर एक सीनियर सिटीजन 4 साल के लिए ₹5,00,000 की एसबीआई में एफडी कराता है तो तिमाही कंपाउंडिंग के आधार पर कैलकुलेशन के मुताबिक, आपको मेच्योरिटी के समय रिटर्न के तौर पर ₹1,54,795 मिलेंगे। यानी मेच्योरिटी के समय आपके पास ₹6,54,795 रुपये का फंड तैयार हो जाएगा।
अगर एक सामान्य ग्राहक 4 साल के लिए ₹5,00,000 की एफडी कराता है तो 6.30 प्रतिशत ब्याज दर के आधार पर कैलकुलेशन के मुताबिक, तिमाही कंपाउंडिंग के आधार पर मेच्योरिटी पर रिटर्न ₹1,42,036 मिलेगा। यानी 4 साल बाद आपके पास कुल ₹6,42,036 तैयार होंगे।
एफडी कराने से पहले ये भी समझ लें
सावधि जमा (एफडी) पर मिलने वाला ब्याज आमतौर पर जमा की शुरुआत की तारीख से हर तिमाही आधार पर जोड़ा या अदा किया जाता है, या फिर परिपक्वता (मैच्योरिटी) के समय मूलधन के साथ एकमुश्त भुगतान किया जाता है। हालांकि, जमाकर्ता की मांग पर 12 महीने या उससे अधिक अवधि की सावधि जमाओं के लिए ब्याज का भुगतान मासिक, छमाही या वार्षिक अंतराल पर भी लिया जा सकता है। इससे निवेशकों को अपनी जरूरत के अनुसार नियमित आय का विकल्प चुनने की सुविधा मिलती है।
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